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चांद पर चैन की नींद सोने वाले हैं विक्रम और प्रज्ञान, करेंगे आखिरी चरण पर काम, इसरो ने कहा तैयारी…

भारत के चंद्रयान-3 मिशन ने चंद्र अन्वेषण में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मिशन का एक हिस्सा, प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा की सतह पर 100 मीटर की दूरी सफलतापूर्वक तय की है। यह उपलब्धि तब आई है जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चंद्रमा पर कम सूरज की रोशनी के कारण विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर दोनों को स्लीप मोड में डालने की तैयारी कर रहा है। यानी चंद्रमा पर चंद्रयान-3 मिशन के दोनों हिस्से चैन की नींद सोने के लिए तैयार हैं। भारत के पहले सौर मिशन के सफल प्रक्षेपण के बाद इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने यह घोषणा की।

इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने शनिवार को कहा कि चंद्रयान-3 के रोवर और लैंडर ठीक से काम कर रहे हैं और जैसे ही चंद्रमा पर रात होगी, उन्हें ‘डीकमीशन’ करने की बात है। उन्होंने बताया और कहा कि लैंडर ‘विक्रम’ और रोवर ‘प्रज्ञान’ अभी भी अपने काम में चालू हैं और “हमारी पूरी टीम अब वैज्ञानिक उपकरणों के साथ बडिया काम पे लगी है”।

उन्होंने बताया की, ” यहां की सही खबर तो ये है कि रोवर लैंडर से लगभग 100 मीटर दूर है और हम सभी ए अगले एक या दो दिन में तो निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू करने वाले ही हैं, क्योंकि अभी तो वहां रात है।”आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से पहले सौर मिशन ‘आदित्य एल1’ के सफल प्रक्षेपण के बाद मिशन नियंत्रण केंद्र से अपने संबोधन में इसरो प्रमुख ने यह जानकारी दी।

सबको पता हो हैं की 14 जुलाई, 2023 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जो लॉन्च किया था वो चंद्रयान -3 ने भारत को चंद्रमा पर एक नए रूप से सफलतापूर्वक उतरने वाला चौथा देश और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास ऐसा करने वाला हमे पहला देश बना दिया गया है। मिशन का प्राथमिक उद्देश्य पानी की खोज करना और चंद्रमा की सतह की विशेषताओं का अध्ययन करना है।

इससे पहले, इसरो ने कहा था कि चंद्रयान-3 मिशन के रोवर ‘प्रज्ञान’ पर लगे एक अन्य उपकरण ने भी एक अलग तकनीक का उपयोग करके चंद्र क्षेत्र में सल्फर की उपस्थिति की पुष्टि की है। इसरो ने सुरक्षित मार्ग की तलाश में आगे बढ़ रहे रोवर का एक वीडियो भी जारी किया है। इस घूर्णन प्रक्रिया का लैंडर इमेजर कैमरे द्वारा वीडियो बनाया गया था। आज लोगों की निगाहें उनके द्वारा किए गए सोशल मीडिया पोस्ट पर टिकी रहीं।

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